"हे गंगा जी की औत हे गंगा जी की औत ,
तराजू न तौली लेण ,कैकी माया भौत
तराजू म तौली लेण हो
हे झंगौरा की घाण, जैकी माया घनघोर
अंखियों मा पछाण, जैकी माया घनाघौर हो
हे सड़कों का घूमा ,हे सड़कों का घूमा ,
सदानी नि रेंदू सुवा ,
सदानी नि रेंदू सुवाजवानी की धुमा , सदानी नि रेंदुं सुवा हो
भैरा रींगी भैराक भैरा रींगी भैराक
तरूणी उमर सुवा ,बथोंसी हराक,
तरूणी उमर सुवा हो
हे घुघूती कु घोल , घुघूती कु घोला ,
मनखी माटु हेवे जांदू रही जांदा बोल ,
मनखी माटु हेवे जांदू हो
हे गौडी कु मखानम हे गौडी कु मखान
दुनिया न मरी जाण दुनिया न मरी जाण,
क्या लिजाण यखान, दुनिया न मरी जाण हो
हे गंगाजी की औन्त , कैकी माया घनाघौर,
तराजू म तौली लेन कैकी माया भौत
तराजू म तौली लेन... हो "
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Monday, June 21, 2010
Saturday, June 19, 2010
हमारा प्यारा उत्तराखंड
हमारा प्यारा उत्तराखंड
यह समुदाय सभी उत्तराखंड के निवासियों, मूल-निवासियों तथा इससे संबंधित सभी व्यक्तियों के लिए है। इस समुदाय को बनाने का उदेश्य (सभी उत्तराखंड के निवासियों ) के सभी निवासियों में संपर्क बढ़ाने, विचार तथा ज्ञान विनिमय आदि है। यहाँ पर आप आप सब अपने बारे में तथा (सभी उत्तराखंड के निवासियों,उत्तराखंड ) के बारे में बातें शेयर कर सकते हैं। -'
'जननी जन्म भूमिस्च, स्वर्गादपि गरीयशी''
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Thursday, June 17, 2010
औरो तै देखा देखी मी भी, पुडीग्यो ये जंजाल मा
औरो तै देखा देखी मी भी, पुडीग्यो ये जंजाल मा
रुप्या पाणि खत्म हवेगेन, बणि ग्यो मी कन्गाल हां - २
डयुटि बटि जब औन्दु घौर, ब्वारि पुडि छ खाट मा
कभी कपाल, कभी टन्गडु, कभी दर्द पेट मा
कभी दर्द पेट मा (कोरस) - २
ब्यो सि पहली स्वर्ग समान, लगदु ये संसार मा
छ्त्यानाश हवेगे अब ता, कजांण क औण मा - २
ब्यो करि तै सोची मीन रौलू, सुख चैन मा
और जादा मुन्डारु हवेगे, यी सरु का औण मा
यु सरु का औण मा (कोरस) - २
डयुटी बटि जब औन्दु देर सी, खाणु बणाणु रात मा
ब्वारी बिचारि ताणिक सियी, वीतै किलाणु हाथ मा - २
सासू ब्वारी कि हवायी लडायी, तब ल्यो मी साथ मा
जू भी सपना देखी छ मीन, सब मिली गे राख मा
सब मिली गे राख मा (कोरस) - २
ब्यो करि तै पछ्तै ग्यो मी, हवेगेन यु हाल हां
डाक्टरो कु चक्कर काटी, मुरिग्यो मी ये साल मा - २
भाड मजान्दू कपडा धोन्दू, कै मा ना तुम बुल्यान
जन मेरा हाल हुया छ्न, तन कैक ना हुयान
तन कैक ना हुयान (कोरस) - २
नयी सुट साडी-बिलोज, लेन्दु हर तन्खवा मा
अपण ईन हाल हुया कि, दिन कटणु छ थिगलो मा - २
औरो तै देखा देखी मी भी, पुडी ग्यो ये जंजाल मा
रुप्या पाणि खत्म हवेगेन, बणि ग्यो मी कन्गाल हां
बणि ग्यो मी कन्गाल हां (कोरस) - २
बणि ग्यो मी कन्गाल हां, बणि ग्यो मी कन्गाल हां
बणि ग्यो मी कन्गाल हां,बणि ग्यो मी कन्गाल हां...................
(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)
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Wednesday, June 9, 2010
आज फिर उनको हमारा ख्याल आया सपने में आकर चुपके से मुझे जगाया
[आज फिर उनको हमारा ख्याल आया
सपने में आकर चुपके से मुझे जगाया]
आज फिर वूं तै मेरो ख्याल आई
सुपिना मा आई कन मितै जगाई
बुलण बैठी भूली जाओ ब्याला कि कहानी
अब फिर शुरु करला हम एक नै कहानी
तुमि ते मी अपरु सहारा बणान चांदू
तुमि तै अपरु प्यार मी बणान चांदू
तुम्ही छंया म्यार श्रृंगार - दर्पण
करणू छौ तुम्ही ते मी सब अर्पण
आज फिर मितै अपरु गल लगे ल्याओ
अपरु नाराज़ दिल ते अब मनै ल्याओ
अब ज्यादा नी करि सकद मी इंतज़ार
खडू छौ मी लेकन फूलूँ कू हार
आज फिर वूं तै मेरो ख्याल आई
सुपिना मा आईकन मितै जगाई
- प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी, यूएई
(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)
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Friday, May 28, 2010
टिरी डाम से कतना परिवार बेघर हुई
टिरी डाम से कतना परिवार बेघर हुई गेनी उथे अपनी घर कुड़ी सेरा पुंगडा सब छोड़ के जानि पड़ी और आप ते ताज्जुब होलू की उत्तराखंड एक छोटू सु राज्य च और उत्तराखंड सरकार अन 500 से जादा डाम प्रस्तावित करिया छन एक डाम से इतना बरबादी भेए वे का बाद ५०० डाम बन्नाला इतना छोटा सा राज्य माँ और तब क्या भविष्य होलू उत्तराखंड का, जब आप कभी छुट्टी जेयला लोटिक उत्तराखंड जेयला इन भी हो सकदा की बुलुं भाई की, आप लोग घर खाली करा एक सिर्फ बिजली घर राला इ पेरें थोडा आप भी विचार करा, उत्तराखंड सरकार और कोई तरीका नहीं उथे पैसा पैदा करने कु नज़र अणू च वो हमारी नदी, दांडी काठी , उथे प्राइवेट कंपनी कु बेच बाच कर डाम बनानी च ५०० से जादा आपका हर घर का पास एक डाम होलू वेका बाद जो हाई टेंसन बिजली की लाइन उख बाटी जानि छन उका तोल रेना वाला लोगों का की हाल होलो उख जो झील बनली च उका तोल कतना सभ्यता डूब जाली... इ फारेन आप प्रवासी बंधू भी जरा विचार करों.
Saturday, May 22, 2010
पहाड़ मैं होगा सब पहाडी , एक होगा पैदा ऐश पहाडी !
पहाड़ मैं होगा सब पहाडी , एक होगा पैदा ऐश पहाडी !फिर न कही अँधेरा मैं होगा अपना पहाडी , सूरज उगेगा मेरे पहाडी वैभव का
पहाड़ का घर-घर अपना फेरा होगा, एक होगा पैदा ऐश पहाडी !!
पहाडी बोली की होगी अपनी बस्तिया , चमकता हुवा हर पहाडी चेहरा होगा !
प्रहरी सुख पहाड़ का घेरा अपना होगा , हर गुज मैं गुजेगा पहाडी अपना होगा !!
हर जुबान पै पहाड़ का पहाडी नारा होगा , उन्नति -प्रगति मैं अपना पहाडी होगा !
तब सुंदर उत्तराखंड पहाड़ हमारा अपना होगा , जब महकेगा पहाडी का पाणी , माटी!
उस दिन धन्य होगा पहाड़ का अपना पहाडी , हर होगा ऐश अपना पहाडी
जिस से धन्य होगा अपना सब पहाडी , जल्दी पैदा होगा अपना पहाडी !!
जय पहाडी भूमि के म्यएर सत सत नमन छु , हर पहाडी जुबान पै पहाड़ लिजी नमन छु
अब हमर पहाड़ ले आपुड़ मैं मग्न छु , हिन्दुतान मैं आपु मैं उ चमन छु पहाडी !!
पहाड़ मैं होगा सब पहाडी , एक होगा पैदा ऐश पहाडी !
फिर न कही अँधेरा मैं होगा अपना पहाडी , सूरज उगेगा मेरे पहाडी वैभव का
पहाड़ का घर-घर अपना फेरा होगा, एक होगा पैदा ऐश पहाडी !!
पहाडी बोली की होगी अपनी बस्तिया , चमकता हुवा हर पहाडी चेहरा होगा !
प्रहरी सुख पहाड़ का घेरा अपना होगा , हर गुज मैं गुजेगा पहाडी अपना होगा !!
हर जुबान पै पहाड़ का पहाडी नारा होगा , उन्नति -प्रगति मैं अपना पहाडी होगा !
तब सुंदर उत्तराखंड पहाड़ हमारा अपना होगा , जब महकेगा पहाडी का पाणी , माटी!
उस दिन धन्य होगा पहाड़ का अपना पहाडी , हर होगा ऐश अपना पहाडी
जिस से धन्य होगा अपना सब पहाडी , जल्दी पैदा होगा अपना पहाडी !!
जय पहाडी भूमि के म्यएर सत सत नमन छु , हर पहाडी जुबान पै पहाड़ लिजी नमन छु
अब हमर पहाड़ ले आपुड़ मैं मग्न छु , हिन्दुतान मैं आपु मैं उ चमन छु पहाडी !!
फिर न कही अँधेरा मैं होगा अपना पहाडी , सूरज उगेगा मेरे पहाडी वैभव का
पहाड़ का घर-घर अपना फेरा होगा, एक होगा पैदा ऐश पहाडी !!
पहाडी बोली की होगी अपनी बस्तिया , चमकता हुवा हर पहाडी चेहरा होगा !
प्रहरी सुख पहाड़ का घेरा अपना होगा , हर गुज मैं गुजेगा पहाडी अपना होगा !!
हर जुबान पै पहाड़ का पहाडी नारा होगा , उन्नति -प्रगति मैं अपना पहाडी होगा !
तब सुंदर उत्तराखंड पहाड़ हमारा अपना होगा , जब महकेगा पहाडी का पाणी , माटी!
उस दिन धन्य होगा पहाड़ का अपना पहाडी , हर होगा ऐश अपना पहाडी
जिस से धन्य होगा अपना सब पहाडी , जल्दी पैदा होगा अपना पहाडी !!
जय पहाडी भूमि के म्यएर सत सत नमन छु , हर पहाडी जुबान पै पहाड़ लिजी नमन छु
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Friday, May 21, 2010
तेरी गोद मैं सोना है मुझे पहाड़,जी भर के रोना है पहाड़
तेरी गोद मैं सोना है मुझे पहाड़ . जी भर के रोना है पहाड़
तू सुला दे मुझे अपने आचल की छाव मैं पहाड़
तू है मेरा सुकून मुझे वही रहना है तेरे पाउ मैं पहाड़ !!!
मुझको बचपन का मासूम फ़रिश्ता याद देगी तेरी गोद
जो ना जाने ज़माने मैं किशी आपने का बोझ
तू सुला दे मुझे नींद वैसी फिर अपनी गोद पहाड़
अब और गम नहीं सहना है मेरे अपना पहाड़
तेरे सीने से लग कर हलका होगा मेरा गम एक दम
तेरी यादु में पहाड़ मुझे मिलेगा अपना बचपन का जन
तेरी हवा मेरी दवा है तेरी ही हम पर दया का एक अंस
तेरे ही पास ही मेरे अपना है जीवन का एक छण भर !!!
मैं तरसता रहा तेरी गोद के लिए पहाड़
तेरी कलकल छाऊ को .. तेरी घास को , तेरी हर लहराती ब्याव को पहाड़
तेरी ही अमानत से जन्नत का खिलौना है मेरे पहाड़ !!!
है ये दुःख जहा देता है रोज़ दर्द के कुछ घाऊ
मैं भुला ना कहा सुकून मिलता है पहाड़ सकुन
तुझसे दूर हो गया हूँ तो हर कोई ठोकर लगा रहा है मुझे
मैं बहुत रूट गया हु , मुझे बुला ले अब अपने पहाड़ !!!
मैं अब रुक ना सकू चलते चलते इन ज्ख्मु पर
दर्द होता है ज्ख्मु पर मलहम लगा दे अपना पहाड़
जल्दी से बुला ले तू पहाडी को उस का अपना पहाड़
वो दोडा-२ कर आएगा अपना पहाड़ ............... .......
तू सुला दे मुझे अपने आचल की छाव मैं पहाड़
तू है मेरा सुकून मुझे वही रहना है तेरे पाउ मैं पहाड़ !!!
मुझको बचपन का मासूम फ़रिश्ता याद देगी तेरी गोद
जो ना जाने ज़माने मैं किशी आपने का बोझ
तू सुला दे मुझे नींद वैसी फिर अपनी गोद पहाड़
अब और गम नहीं सहना है मेरे अपना पहाड़
तेरे सीने से लग कर हलका होगा मेरा गम एक दम
तेरी यादु में पहाड़ मुझे मिलेगा अपना बचपन का जन
तेरी हवा मेरी दवा है तेरी ही हम पर दया का एक अंस
तेरे ही पास ही मेरे अपना है जीवन का एक छण भर !!!
मैं तरसता रहा तेरी गोद के लिए पहाड़
तेरी कलकल छाऊ को .. तेरी घास को , तेरी हर लहराती ब्याव को पहाड़
तेरी ही अमानत से जन्नत का खिलौना है मेरे पहाड़ !!!
है ये दुःख जहा देता है रोज़ दर्द के कुछ घाऊ
मैं भुला ना कहा सुकून मिलता है पहाड़ सकुन
तुझसे दूर हो गया हूँ तो हर कोई ठोकर लगा रहा है मुझे
मैं बहुत रूट गया हु , मुझे बुला ले अब अपने पहाड़ !!!
मैं अब रुक ना सकू चलते चलते इन ज्ख्मु पर
दर्द होता है ज्ख्मु पर मलहम लगा दे अपना पहाड़
जल्दी से बुला ले तू पहाडी को उस का अपना पहाड़
वो दोडा-२ कर आएगा अपना पहाड़ ...............
म्यर पहाड़ ...............
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