
जै दिन कठुलि रात ब्यालि, पौं फाटला कौ कड़ालि
जै दिन कठुलि रात ब्यालि, पौं फाटला कौ कड़ालि
जै दिन कठुलि रात ब्यालि, पौं फाटला कौ कड़ालि
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में (कोरस)
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जै दिन नान-ठुलो नि रौलो, जै दिन त्यर-म्यरो नि होलो
जै दिन नान-ठुलो नि रौलो, जै दिन त्यर-म्यरो नि होलो
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में (कोरस)
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जै दिन चोर नि फलालि, क्वैके जोर नि चलोलो
जै दिन चोर नि फलालि, क्वैके जोर नि चलोलो
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
चाहे हम नि ल्यै सकों, चाहे तुम नि ल्यै सको
चाहे हम नि ल्यै सकों, चाहे तुम नि ल्यै सको
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै त ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में (कोरस)
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जै दिन नान-ठुलो नि रौलो, जै दिन त्यर-म्यरो नि होलो
जै दिन नान-ठुलो नि रौलो, जै दिन त्यर-म्यरो नि होलो
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में (कोरस)
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जै दिन चोर नि फलालि, क्वैके जोर नि चलोलो
जै दिन चोर नि फलालि, क्वैके जोर नि चलोलो
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
चाहे हम नि ल्यै सकों, चाहे तुम नि ल्यै सको
चाहे हम नि ल्यै सकों, चाहे तुम नि ल्यै सको
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै त ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैंता क्वै न क्वै तो ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि तो आलो


मैदान में आयोजित रामलीला मंचन के आखिरी दिन रामभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। आखिरी दिन मंचन से लेकर समाप्ति रामभक्तों द्वार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र भगवान की जय के उद्घोषों समूचा आयोजन रामभक्ति से सराबोर हो उठा। आखिरी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र भगवान द्वारा रावण का वध कर दिया जाता है।