Thursday, May 21, 2009

दिन हुआ है तो रात भी होगी,हो मत उदास कभी तो बात भी होगी,


दिन हुआ है तो रात भी होगी,हो मत उदास कभी तो बात भी होगी, इतने प्यार से दोस्ती की हैखुदा की कसम जिंदगी रही तो मुलाकात भी होगी. कोशिश कीजिए हमें याद करने कीलम्हे तो अपने आप ही मिल जायेंगेतमन्ना कीजिए हमें मिलने कीबहाने तो अपने आप ही मिल जायेंगे .महक दोस्ती की इश्क से कम नहीं होतीइश्क से ज़िन्दगी ख़तम नहीं होतीअगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्त का तो ज़िन्दगी जन्नत से कम नहीं होतीसितारों के बीच से चुराया है आपकोदिल से अपना दोस्त बनाया है आपकोइस दिल का ख्याल रखनाक्योंकि इस दिल के कोने में बसाया है आपको अपनी ज़िन्दगी में मुझे शरिख समझनाकोई गम आये तो करीब समझनादे देंगे मुस्कराहट आंसुओं के बदलेमगर हजारों दोस्तो में अज़ीज़ समझना.. हर दुआ काबुल नहीं होती , हर आरजू पूरी नहीं होती ,जिन्हें आप जैसे दोस्त का साथ मिले ,उनके लिए धड़कने भी जरुरी नहीं होती दिन हुआ है तो रात भी होगी, हो मत उदास कभी तो बात भी होगी, इतने प्यार से दोस्ती की हैखुदा की कसम जिंदगी रही तो मुलाकात भी होगी

आज अचानक दिल ने दस्तक दी,

आज अचानक दिल ने दस्तक दी, पुरानी यादो को ताज़ा कर एक हवा दी, कहाँ से चले थे और कहाँ पहुँच गए,क्या सोचा और क्या कर गए?वादियों की गोद में जो बचपन बीता था,शहर की भीड़ में वो आज गुमनाम है, जिनसे बिछड़ने में कभी डर लगता था,आज उन्ही के लिए हम अनजान हैं, अपना प्रदेश छोड़ा , छोड़ी अपनी माटी,उनसे हम दूर हुए, जहाँ से सीखी परिपाटी, आज भावः विभोर मन उदास हो आया है,बीती यादो में आज अपना बचपन याद आया है, याद आता है वो बचपन जब पाटी पर लिखा करते थे,और बात बात पर रूठ कर माटी से लिपटा करते थे,बढ़ते बच्चे जब पड़ने लगे अ आ बाराखडी,फ़िर वही एक उदासी मन में आने लगी ,की पढ़ लिखकर जायेंगे कहाँ, और कहाँ करेंगे नौकरी,इसी सोच और पीड़ा ने न जाने कब बड़ा बना दिया,और गाँव की माटी ने परदेश के लिए विदा कर दिया,शहर के हालत भी देखे और देखि यहाँ की ज़िन्दगी,पर रस न आई वो बानगी और बन्दिगी,अब तो बस रह रह कर यही विचार आता है,की कब लौट चले अपने पहाडो पर, जो मेहनत की और पसीना बहाया है यहाँ पर, अपने मुल्क में जाकर उसी को बनाये अपना सहारा



मन च आज मेरु बोलंण लग्युं जा घर बौडी जा तौं रौत्याली डंडी कांठियों मा मेरु मुलुक जग्वाल करणु होलू कुजणी कब मैं वख जौलू कब तक मन कें मनौलूअपणा प्राणों से भी प्रिय छ हम्कैं ई धारा किलै छोड़ी हमुन वु धरती किलै दिनी बिसरा इं मिट्टी माँ लीनी जन्म यखी पाई हमुन जवानी खाई-पीनी खेली मेली जख करी दे हमुन वु विराणीहमारा लोई में अभी भी च बसी सुगंध इं मिट्टी की छ हमारी पछाण यखी न मन माँ राणी चैन्दि सबुकी देखुदु छौं मैं जब बांजा पुंगडा ढल्दा कुडा अर मकान खाड़ जम्युं छ चौक माँ, कन बनी ग्ये हम सब अंजानयाद ओउन्दी अब मैकि अब वु पुराणा गुजरया दिन कन रंदी छाई चैल पैल हर्ची ग्यैन वु अब कखि नी छिंनयाद बौत औंदन वू प्यारा दिन जब होदू थौंकाली चाय मा गुडु कु ठुंगार पूषा का मैना चुला मा बांजा का अंगार कोदा की रोटी पयाजा कु साग बोडा कु हुक्का अर तार वाली साजचैता का काफल भादों की मुंगरी जेठा की रोपणी अर टिहरी की सिंगोरी पुषों कु घाम अषाढ़ मा पाक्या आम हिमाला कु हिंवाल जख छन पवित्र चार धामअसुज का मैना की धन की कटाई बैसाख का मैना पूंगाडो मा जुताई बल्दू का खंकार गौडियो कु राम्णु घट मा जैकर रात भरी जगाणुडाँडो मा बाँझ-बुरांश अर गाडियों घुन्ग्याटडाँडियों कु बथऔं गाड--गदरो कु सुन्सेयाट सौंण भादो की बरखा, बस्काल की कुरेडी घी-दूध की परोठी अर छांच की परेडीहिमालय का हिवाँल कतिकै की बगवालभैजी छ कश्मीर का बॉर्डर बौजी रंदी जग्वाल चैता का मैना का कौथिग और मेला बेडू- तिम्लौ कु चोप अर टेंटी कु मेलाब्योऊ मा कु हुडदंग दगड़यो कु संग मस्क्बजा की बीन दगडा मा रणसिंग दासा कु ढोल दमइया कु दमोऊ कन भालू लगदु मेरु रंगीलो गढ़वाल-छबीलो कुमोऊबुलाणी च डांडी कांठी मन मा उठी ग्ये उलारआवा अपणु मुलुक छ बुलौणु हवे जावा तुम भी तैयार

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कुछ रिश्ते होते हैं "हवाओं" की तरह, बनके "खुशबू" ज़िन्दगी मैं घुल जाया करते हैं,


कुछ रिश्ते होते हैं "हवाओं" की तरह, बनके "खुशबू" ज़िन्दगी मैं घुल जाया करते हैं, कुछ शख्स होते हैं "धुन" की तरह, बनके "ग़ज़ल" ज़िन्दगी सुरमई कर जाया करते हैं, जाने क्यूँ जब भी ज़िक्र होता है नाम का आपके, हम "ग़ज़ल" की "धुन" और "हवाओं" की "खुशबू" को महसूस कर जाया करते हैं.......


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यह जो हो रही है दो दिलों के दरमियान



यह जो हो रही है दो दिलों के दरमियान ,यह अजब सी गुफ्तगू क्या है,कभी होता था मौसम गुलाबों का जहाँ ,आज वहां काटों सी चुभन क्या है,मुस्कुराहटों का दौर हुआ करता था जिन होटों पे कभी,आज उन होटों पे गम-ऐ-ग़ज़ल क्या है,किसी ज़माने में हंसा करती थी जो आँखें,उन आंखों मैं यह आंसू क्या है,मानके खुदा तुझे किए सजदे तेरे इश्क में,तोह यह इबादतों मैं बेवफाई का ज़िक्र क्या है,कहते है शायर की है बेंतेहा सुकूं इश्क में,तोः फिर यह बेकरारी सी दिल मैं क्या है,क्यूँ भरते है वो दम मोहोब्बत का अपनी,जो ख़ुद समझते नही मोहोब्बत की आबरू क्या है,इसी उम्मीद पे काटी है ज़िन्दगी नलिन ने,वो काश पूछते की आरजू क्या है,

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बस एक हाँ के इंतज़ार में रात यूँ ही गुज़र जायेगी,

बस एक हाँ के इंतज़ार में रात यूँ ही गुज़र जायेगी,अब तोः बस उलझन है साथ मेरे नींद कहाँ आएगी,सुबह की किरण न जाने कोनसा संदेश लाएगी,रिमझिम सी गुनगुनायेगी या प्यास अधूरी रह जायेगी अब तोः बस सारी रात उसकी यादें आएगी,हर गुज़रते पल में उसकी बातें आएगी,उसकी शरारतें मेरे चेहरे मुस्कराहट लाएगी,मेरी आँखें उसकी झील सी आंखों में डूब जायेगी,उसकी बातें किसी मीठी धुन की तरह कानो में घुल जायेगी,उसकी मासूम हँसी सुकूं की तरह दिल में उतर जायेगी,मेरी साँसों में वो बनके खुशबु बस जायेगी,मेरी नींद में भी ख्वाब बनके वो आएगी,जो आया मोहोब्बत का पैगाम तोः यह ज़िन्दगी संवर जायेगी,ज़िन्दगी के इस सफर को एक मंजिल मिल जायेगी,अगर हुई रुसवाई तोः ज़िन्दगी कुछ ऐसी हो जायेगी,जिंदा रहूँगा में पर ज़िन्दगी ख़तम हो जायेगी,अब तोः खुदा जाने या मेरा साजन की मेरी मोहोब्बत क्या रंग लाएगी,है उम्मीद की चाँद सितारों सी आसमान में मुकम्मल हो जायेगी,जो हुई सच्ची तोः मोहोब्बत मेरी कुछ ऐसा असर कर जायेगी,मेरी प्यार भरी "गुजारिशें" उन्हें कुबूल हो जायेगी.........

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Tuesday, May 19, 2009

कू भग्यान होलू डांड्यू मां.

कू भग्यान होलू डांड्यू मां, यनि भली बांसुरी बजाणुबजाणु रे…… कू भग्यान होलू डांड्यू मां….. कू भग्यान… होलू क्वी बिचारू मैं जनू, नखर्याली बांद रिझाणुरिझाणु रे….. होलू क्वी बिचारू मैं जनू…. होलू क्वीफूल हमथें देख-देखि, पोतलो सन कांडा छीनपोतलो सन कांडा छीनभौंरा दीखा दिजा कैंमा, छुई हमरि लगाना छीनको बेशर्म होलू तो सणी तेरि-मेरि माया बिगाणूबिगाणू रेsssss.....होलू क्वी बिचारू मैं जनू…. होलू क्वीये डांडी बचानि होली कि, डालि बोटी गाणि होलीडालि बोटी गाणि होलीरसीला गीतों की भांण, कख बटि आणि होली को घस्यार होली रोल्यू मां, अपना सौंजर्या थे बत्याणिबत्याणि रेsssss….होली क्वै बिचारी मैं जनी…. होली क्वैमन मां बसायी मेरी, क्व होली दुन्या से न्यारीक्व होली दुन्या से न्यारीआंख्यूं मां लुक्याई बोल, को होली हिया की प्यारीकू बेमान होलू बोला जी, लगदू जो आखूं से भी स्वाणूंस्वाणूं रेsssss…..होलू क्वी बिचारू मैं जनू…. होलू क्वीकू भग्यान होलू डांड्यू मां, यनि भली बांसुरी बजाणुबजाणु रेsssss……होलू क्वी बिचारू मैं जनू…. होलू क्वी