Friday, May 15, 2009

बहुत याद आदी है “दीदी” तुम्हारी


बहुत याद आदी है “दीदी” तुम्हारी मुझे “भाई” कहके बुलानावो मद्धम सा मुस्कुराना और वो झूठ-मूठ का गुस्सा दिखाना,
समझना मेरी हर बात को और मुझे हर बात समझाना,वो लड़ना तेरा मुझसे और फिर प्यार जताना
बहुत याद आता है “दीदी” तुम्हारा मुझे “भाई” कहके बुलाना,वो शाम ढले करना बातें मुझसे और अपनी हर बात मुझे बताना,
सुनके मेरी बेवकूफियां तुम्हारा ज़ोर से हंस जाना,मेरी हर गलती पे लगाना डांट और फिर उस डांट के बाद मुझे प्यार से समझाना
कोई और न होगा तुमसे प्यारा मुझे यह आज मैंने है जाना,वो राखी और भाई-दूज पे तुम्हारा टीका लगाना,
कुमकुम मैं डूबी ऊँगली से मेरा माथा सजाना,खिलाना मुझे मिठाई प्यार से और दिल से दुआ दे जाना,
बाँध के धागा कलाई पे मेरी अपने प्यार को जताना,कभी बन जाना माँ मेरी और कभी दोस्त बन जाना,
देना नसीहतें मुझे और हिदायतें दोहराना,जब छाये गम का अँधेरा तोः खुशी की किरण बनके आना,
हाँ तुम्ही से तोः सिखा है मैंने गम मैं मुस्कुराना,कहता है मन मेरा रहके दूर तुमसे मुझे अब एक लम्हा भी नही बिताना,
अब बस “गुड्डू” को तोः है अपनी “परी दीदी” के पास है जाना,हैं बहुत से एहसास दिल मैं समाये पता नही अब इन्हे कैसे है समझाना,
बस जान लो इतना “दीदी” बहुत याद आता है तुम्हारा “भाई” कहके बुलाना

Thursday, May 14, 2009

Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki


Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet ki Dandi kanthiyon ko hue, gauli gae holu Myara maeta ko bon, mauli gae holu Chakula gholu chodi, udana hwala -2 Bethula maetuda ku, paetana hwala Ghuguti ghuron lagi hoooooo Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet ki Ritu, ritu chaet ki, ritu, ritu chaet kiDandiyun khilana hola, burosi ka phoolPathiyun haisani holi, phyoli mol molKulari phulpaati leki, delhiyun delhiyun jaala -2Dagdya bhagyaan thadya, chaupala lagalaGhuguti ghuron lagi hooooooooooooooooooGhuguti ghuron lagi myara maeta ki Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet kiRitu, ritu chaet ki, ritu, ritu chaet ki Tibari ma baithya hwala, Babaji udaas Batu heni holi Maaji, lagi holi saas Kab myara maeti auji, desa bhenti aala -2 Kab myara bhai behno ki raaji khushi lyala Ghuguti ghuron lagi hooo Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet कीRitu, ritu chaet kiRitu, ritu chaet kiRitu, ritu chaet kiRitu, ritu chaet की

उत्तराखंड के एक लोक गायक श्री प्रहलाद सिंह मेहरा


उत्तराखंड के एक लोक गायक श्री प्रहलाद सिंह मेहरा ने पहाड़ की महिलाओ की कठिन जीवन पर यह हिर्दय स्पर्शी गीत लिखा है :================================================पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले राति उठी, पोश गाड़ना पानी ले भरी लियूना बिना कलेवा रुवाटा, तिवीली जाण घास का मगनाबार बाजी तू घर आयी सासू के गाली पायी पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले भान माजी ले चूल लिपि ले फिर गोरु मुचूणा,गोरु का दगाड, ब्वारी तिवीली रित घर नी उणासूख लाकडा तोडी लाई, सासू की गाली पायी पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले अशौज में धान कटाना, चैत में ग्यू टीपनामंगसिर में तवील जाण, घास के मागनछय ऋतू बीत गयी, तेरी बुति पूरी नी भयीबार मास बीत गयी तेरी बुति पूर नी भयी पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले ................................

महिलाओ को कई कठिनाईयों के बारे में


दोस्तों उत्तराखंड के कई लोग गीतों मे यहाँ के महिलाओ के कठिन जीवन और दुःख का वर्णन है ! प्रकृति ने पहाड़ को जितनी सुन्दरता दी है लेकिन वही दूसरी तरफ यहाँ के लोगो के आम जिन्दगी भी बहुत की कठिनाई भरी है और खासतौर से महिलाओ के लिए ! एक तरफ पहाड़ के खेतो में कठिन मेहनत वही दूसरी तरफ पारिवारिक सुख से वंचित! जैसेकि यहाँ एक प्ररम्परा सी बनी है कि यहाँ के नवजवानों को नौकरी के पहाड़ छोड़ के बहार जाना होता है और महिलाओ को कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है जिसका कि हमारे लोक गीतों काफी वर्णन है! हम यहाँ पर एसे लोक गीतों के बारे में लिखेंगे !

रूम झूमाबरखा झुकी ऐगे डांडीयूँ कुयेडी छैगे

रुमझुमा रुमझुमा रुमझुमा रुमझुमारूम झूमा रूम झूमा रूम झूमारुमझुमा रुमझुमा रुमझुमा रुमझुमारूम झूमा रूम झूमा रूम झूमाबरखा झुकी ऐगे डांडीयूँ कुयेडी छैगे रूम झुमा रूम झुमाबिजली चम्कैगे हाय मन मेरु घबरैगे रूम झुमा रूम झुमाबरखा झुकी ऐगे डांडीयूँ कुयेडी छैगे रूम झुमा रूम झुमा-२रूम झुमा रूम झुमा हए रूम झुमा रूम झुमातन भिजिगे मन भिजिगे हए गोरु बदन भिजिगे-२ज्वानी की झकझोर मा छोरी, ज्वानी की झकझोर मा छोरीफ्योली जसी तू खिलिगेकालू बदल छैगे, सरू अंधेरु ह्वेगेकालू बदल छैगे हए सरू अंधेरु ह्वेगेरूमझुमा रूमझुमा-२रूम झुमा रूम झुमा हए रूम झुमा रूम झुमामेरा दिल कु चैन चलिगे आंख्युं की नींद उडिगे-२तेरी मेरी माया की डौंडी, तेरी मेरी माया की डौंडीसैरा गोंउ मा पिटिगेकनी आफत ऐगे, बदनामी ह्वेगेकनी आफत ऐगे हए बदनामी ह्वेगे हए रुमझुमा रुमझुमारूम झुमा रूम झुमा हए रूम झुमा रूम झुमासुध बुध हर्चिगे मेरी मीठी मीठी छुयुं मा तेरी-२सुप्न्यों मा एकी तुभी सुप्न्यों मा एकी तूभी त निंद उड़ानदी मेरीमन मगन ह्वेगे, तन अगन लैगेमन मगन ह्वेगे हए तन अगन लैगे हए रुमझुमा रुमझुमारूम झुमा रूम झुमा हए रूम झुमा रूम झुमाहए बरखा झुकी ऐगे डांडीयूँ कुयेडी छैगे रूम झुमा रूम झुमाहए रूम झूमा रूम झूमा हए रूम झूमा रूम झूमाहए रूम झूमा रूम झूमा हए रूम झूमा रूम झूमा

हे देवा तू दैण है जाए देवा हो


हे देवा तू दैण है जाए देवा होतू दैण है जाए देवा होभूमि का भूमिया देवा होभूमि का भूमिया देवा होजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारदाणा गोल्ज्यू , भंडारी गोल्ज्यू, चितई गोल्ज्यू किरपा राखेनिर्धन कै तू धन दी छे, बाझँ कै दी संतान४ धाम में छे त्येर नाम, हाथ जोड़ी करू परनामजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारदाणा गोल्ज्यू , भंडारी गोल्ज्यू, चितई गोल्ज्यू किरपा राखेजागीश्वर में छू जागनाथ, सारी दुनिया ल्थामी हातबागीश्वर में छू बाघनाथ, पवित्र छू सरयू की घाटजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारदाणा गोल्ज्यू , भंडारी गोल्ज्यू, चितई गोल्ज्यू किरपा राखेदूनागिरी में छू दुर्गा माता, महा काली छू गंगोली हाटपांखू थल में कोटगारी माता, चंडी का धाम बसी छू घाटजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारदाणा गोल्ज्यू , भंडारी गोल्ज्यू, चितई गोल्ज्यू किरपा राखेतेरी दरबार जो औनि देवा, उके मिल जानी तेरी मेवाअन्याय के नाश करी छे, न्याय को छो यो तेरी दरबारजय जय देवा चितई गोलू सुन मेरी पुकारआस लगे बेर आयू तेरी दरबारदाणा गोल्ज्यू , भंडारी गोल्ज्यू, चितई गोल्ज्यू किरपा राखे

बरखा हवेली बत्वानी होलू रै, छौया मन्दारों कु पाणी होलू रैजाली सुवा घासु का डांडीयों मा


बरखा हवेली बत्वानी होलू रै, छौया मन्दारों कु पाणी होलू रैजाली सुवा घासु का डांडीयों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !! धरयों खांदा मा चाकू कितलू, चुल्ला मा भावरानी च आग ! छन स्वामी परदेश मा देवतों, रख्या राजी तुमु मेरु सुहाग !!मेरी प्यारी उदास न होई ,मैं छुटी का अरज देणु छौं !लगदा मंगसीर का मैना,मेरी प्यारी मैं घोर ऑनु छौं !! लगी सौणकी कुरेडी रोला गदरियों मा ,हौंदु सिंस्याट ! घुट घुट लगदी च बडुली, दिल मा हौंदु धक् धक्द्याट !!!बौन पंछी , गाड गद्नियों ,मेरी प्यारी खुदेनं न देना !!होली घासु क जांई बाणु मा तुमु सौं छन वीं रौन न देना !!! सेवा सौंली, राजी खुसी अपणी तुमु फ़ोन मा दी दयान! बाटु देखुलू मंगसीर क मैना ,स्वामी घोर जरूर अयान !!प्यारी कन क्वे कटेला यी दीन,मेरु त्वेसी बिछाडाट करयों च !बाकि पर्देसू नौकरी क बानाघर गाँव गुठयार छोडीयूँ च !!!! पर्देसू मा अफु रयान , मेरा बाना नि मन झुराण! मैं जन्नी छुओं ,अपणाघोर मा स्वामी तुमु अपणु ख्याल रख्यान!!!सुवा तू अपणु ख्याल रख्यान , बरखा होली बत्वानी होलू रै चौया मंद्रों कु पाणी होलू रै!जाली सुवा घासु क डंडियों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!!!