Monday, April 12, 2010

चमकि चम्म चमकि घाम कांठ्यूं मां हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि

चम चमा चम, चम-चम चम-चम चम्म चमकि, चमकि चम्म चमकि घाम कांठ्यूं मां
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
बणि गैनि… बणि गैनि…
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि

शिव का कैलाशु ग्याइ पैलि-पैलि घाम,
शिव का कैलाशु ग्याइ पैलि -पैलि घाम
सेवा लगौणुं आइ बदरी का धाम.. बे..
बदरी का धाम बे बदरी का धाम 
सर्र फैलि, फैलि, सर्र फैलि- घाम डांडों मां
पौलि पन्छि डांड़ि डाल बौटि बिजि गैनि, पौलि पन्छि डांड़ि डाल बौटि बिजि गैनि  
'बिजि गैनि… बिजि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
ठण्डु -माठु चड़ि घाम फुलुं की पाख्युं मां
ठण्डु-माठु चड़ि घाम फुलुं की पाख्युं मां
लागि कुतगैलि तौंकी नागि काख्युं मां …बे…
नागि काख्युं मां बे नागि काख्युं मां
खिच्च हैसनि, हैसनि, खिच्च हैसनि फूल डाल्यूं मां
भौंरा पौतेला रंगमत बणी गैनि, भौंरा पौतेला रंगमत बणी गैनि 
बणी गैनि.. बणी गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
डांड़ि कांठि बिजालि पौंचि घाम गौं मां
डांड़ि कांठि बिजालि पौंचि घाम गौं मां
सुनिन्द पौड़ि छे बेटि ब्वारि ड्यरौं मां.. बे…
ब्वारि ड्यरौं मां बे ब्वारि ड्यरौं मां..
झम्म झौल, झौल, झम्म झौल लागि आख्यूं मां
मायादार आख्यूं का सुपिन्या उड़ि गैनि, मायादार आख्यूं का सुपिन्या उड़ि गैनि
उड़ि गैनि..उड़ि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
छुयुं मां बिसै गैनि पन्देरु मां पन्देनि
छुयुं मां बिसै गैनि पन्देरु मां पन्देनि
भांणि पुरि गैनि तौकि छुईं नी पुरैनि ..बे…
छुईं नी पुरैनि बे छुईं नी पुरैनि
खल्ल खतै, खतै, खल्ल खतै घाम मुखुड़्युं मां
बिजादिनि मुखड़ि सुना कि बणि गैनि, बिजादिनि मुखड़ि सुना कि बणि गैनि
बणि गैनि..बणि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि 

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Bisht G
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Wednesday, April 7, 2010

''वर्तमान में पहाड़ के हाल''

जब पी व्हिस्की तब दुख खिसकी
जब पी रम तब मिटी गम .
आर कच्ची कू असर क्या क्य बोलण तब ,
एक घूँट दारू कू मज़ा क्य बोलण तब,...
( मतलब की वर्तमान में पहाड़ के हाल ये हो गये हैं की शराब हर बात का इलाज़ है वा ! क्या बात हैं ये तंज़ शराब के शौकीन गढ़वाल पर है कोई राय पीने की नही दी बल्कि मज़ाक बनाया है )

हिंसर की जड़ों कू पाणी गोरख्यों न छानी
पहाड़ू बैक क्या यू गोरख्यों न पछाणि
बैक पी की मस्त कजणि पोंगडी मा हाड़गी तोड़ानी
कख़ी कच्ची का कॅनटर कख़ी छन्ग का घुटका
एक घूँट दारू कू मज़ा क्य बोलण तब.............

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Bisht G
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Tuesday, April 6, 2010

प्यार मा नोनियों ते धोखा देण वालाओ लोगो तई छ मेरु यू पैगाम...

प्यार मा नोनियों ते धोखा देण वालाओ लोगो तई छ मेरु यू पैगाम...
आजकल का नोना जु आफु तई बहुत बडा लव गुरु समझ दान और कैकी भूली दीदी गेल धोका देनान...
यनु भी होए सकदु की नोनी भी धोखा देंदी पर अपना उत्तराखंड मा यनु कुई फैशन नी छ..
शायद सा मेरा देखणा मा और अगर मेरी या चार लाइन कै तई दुःख पहुचाऊ त वे खती माफ़ी चांदु...
मिन त बोल्याली तुम भी सुणी ल्या..


प्यार कु नौ नी ले , नितर मुंड कपाली होली..

दुबारा ना मिले मी तई नितर झिडक्ताली होली..

अब की दों फिर ना दिखे मेरा हाथ मा मुछाली होली..

हुँकार भरली नारी शक्ति और रणसिंघा बजलू वा युध होलू..

त्वये जनि लव गुरु बणण वालो लोगो कु वध होलू......


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Bisht G
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Saturday, April 3, 2010



एक हल्या (हल लगाने वाला) अपने बुड़े बेलो को देखकर ये सोच रहा है, और मन हि मन मैं गुनगुना रहा है,.......



चल मेरी डागी अभी तिन सारा पुगडा होल लगान.
तभी जन तिन और मीन घर..
चल चल डीस देख ना..
तीर ना देख उकाली उनधार..
चल मेरी डागी अबी तिन सारा पुगडा होल लगान...

Saturday, March 27, 2010

''उत्तराखंड में शर्मशार होती बहु बेटियां''

देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की संस्कृती व परम्परा को भले ही यहाँ के लोक गायकों द्वारा खूब प्रचारित किया गया हो लेकिन कुछ गवेये द्वारा यहाँ की संस्कृती व बहु बेटियों को शर्मशार करके रख दिया है.
उत्तराखंड के कुछ लोकगायकों द्वारा अपने गीतों के माध्यम से यहाँ की बहु बेटियों को " फुर्की बांध" " लबरा छोरी " " शिल्की बांध " " चकना बांध " " पटाखी " सहित कई अन्य उत्पतांग शब्द देकर अपमानित किया जा रहा है. कुछ ज्यादा ही प्रचारित किया जा रहा है.
ऐसे में तो यही समझा जा सकता है की इस देवभूमि में महिलाओं की शायद क़द्र अब कम होने लगी हैं.
आज हर संस्थावों में महिलाओं को आगे बढ़ने की बात भले ही की जा रही हो लेकिन स्वयं सेवी संस्था भी इन गीतों में मस्त होकर झूम रहे हैं.
परन्तु इन गानों पर न तो अंकुश लगाया जा रहा है और न ही कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है
इन गायकों को अपने शो के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. और वो " फुर्की बांध" " लबरा छोरी " " शिल्की बांध " "
" चकना बांध " " पटाखी " सहित कई अन्य उत्पतांग शब्दों से भरे गलियों के अर्थ वाले गाने गाकर फुर्र हो जाते हैं.
देवभूमि में ऐसे शब्दों को गाली समझा जाता है. यह बात जानने के बावजूद भी ये गवेये ऐसे गीत बनाना और गाना अपनी शान समझते हैं.
ऐसे में यही समझा जा सकता है
की हर घर की बहु बेटी " फुर्की बांध" " लबरा छोरी " 
" शिल्की बांध " " चकना बांध " " पटाखी " है और इन गवेयों पर कोई भी अंकुश लगाने वाला नहीं है .
जिससे हर घर की बहु बेटी को अपमान भरे गाने सुनने को बिबश होना पद रहा है........

आप् क्या कहते हो इस बारे मैं ?

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Bisht G
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Saturday, March 13, 2010

"माँ की आँखों मैं आंसू"


उत्तराखंड के एक गोँव में,
अकेली माँ,
इन्तजार में है अपने बेटे की,
क्योंकि जिसे उसने,
बचपन में पाल पोसकर,
पढाया लिखाया,
कामयाबी की राह में,
आगे बढाया,
लेकिन एक दिन,
जवान होने पर,
वह उसकी आँखों से,
दूर चला गया,
रोजगार की तलाश में.

कैसी कसक है उसके मन में,
जिसे उसने बुढापा का सहारा समझा,
आज दूर है उससे,
लेकिन कासिस उसके मन में भी है,
माँ से दूर होने की.

वक्त निकालकर जब वह जाता है गाँव,
तो
माँ से मिलने पर छलक जाते हैं,
माँ की आँखों में आंसू.


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Bisht G

Friday, February 26, 2010

रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की, रंग-रंगिलि, हो रंग-रंगिलि होरी है


चलि बसन्ती बयार
आयी फुंलौं मां फुलार
आयी फुंलौं मां फुलार
चलि बसन्ती बयार, आयी फुंलौं मां फुलार
भौंरा लिगैनि, लिगैनि- भौंरा होss
भौंरा लिगैनि, फुलौं कु रस चोरी की
रंग-रंगिलि, हो रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की, रंग-रंगिलि
होरी है
फागुन-चैत कु त्युहार
फागुन-चैत कु त्युहार
आन्दु रया बार-बार
आन्दु रया बार-बार
फागुन-चैत कु त्युहार, आन्दु रया बार-बार
गैल्या संग खेला, रंग खेला हो
गैल्या संग खेला, रंग जो होरी कि
रंग-रंगिलि- हो रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की, रंग-रंगिलि
रंग-रंगिलि
गैल्या आज अपणां हाथुन, अबिर गुलाल लगे जा हो हो
अबिर गुलाल लगे जा
झणि अब फिर कब हुन्दि भेंट, समलौंण्या चदरि रंगे जा
ऐस्युं कि होरि मां- समलौण्या चदरि रंगे जा
ऐजा आख्युं मां समै जा गैल्या हो – ऐजा आख्युं मां समै जा प्रीत जोड़ी की
रंग-रंगिलि
रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की, रंग-रंगिलि, हो रंग-रंगिलि
ज्यु बौनु छ प्रेम का रंगुन, तेरि कोरि जिकुड़ि रंगे दयु
हो हो तेरि कोरि जिकुड़ि रंगे दयु
लाल बुरुंशि का फुलुन, तेरि स्युंद पाटि सजै दयु
ऐंसु कि होलि मां, तेरि स्युंद पाटि सजै दयु
देद्यु-देद्यु सैरि जिंदगि हो
देद्यु-देद्यु सैरि जिंदगि निचोड़ि की
रंग-रंगिलि- होरी है
रंग-रंगिलि बहार ऐगे होरी की, रंग-रंगिलि, हो रंग-रंगिलि
होरी है